वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
संग सखीं सुंदर चतुर गावहिं मंगलचार । गवनी बाल मराल गति सुषमा अंग अपार ॥ २६३ ॥
साथमें सुंदर चतुर सखियाँ मंगलाचारके गीत गा रही हैं। सीताजी बालहंसिनीकी चालसे चलीं। उनके अंगोंमें अपार शोभा है ॥ २६३ ॥
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