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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 265

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

गौतम तिय गति सुरति करि नहिं परसति पग पानि । मन बिहसे रघुबंसमनि प्रीति अलौकिक जानि ॥ २६५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

गौतमजीकी स्त्री अहल्याकी गति का स्मरण करके सीताजी श्रीरामजीके चरणोंको हाथोंसे स्पर्श नहीं कर रही हैं। सीताजीकी अलौकिक प्रीति जानकर रघुकुलमणि श्रीरामचन्द्रजी मनमें हँसे ॥ २६५ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 265 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik