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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 267

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

अरुन नयन भृकुटी कुटिल चितवत नृपन्ह सकोप । मनहुँ मत्त गजगन निरखि सिंघकिसोरहि चोप ॥ २६७ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उनके नेत्र लाल और भौंहें टेढ़ी हो गईं और वे क्रोधसे राजाओंकी ओर देखने लगे, मानो मतवाले हाथियोंका झुंड देखकर सिंहके बच्चेको जोश आ गया हो ॥ २६७ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 267 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik