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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 270

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

सभय बिलोके लोग सब जानि जानकी भीरु । हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु ॥ २७० ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तब श्रीरामचन्द्रजी सब लोगोंको भयभीत देखकर और सीताजीको डरी हुई जानकर बोले - उनके हृदयमें न कुछ हर्ष था, न विषाद ॥ २७० ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 270 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik