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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 273

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जो बिलोकि अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर । सुनि सरोष भृगुबंसमनि बोले गिरा गभीर ॥ २७३ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इन्हें देखकर मैंने कुछ अनुचित कहा हो, तो उसे हे धीर महामुनि! क्षमा कीजिए। यह सुनकर भृगुवंशमणि परशुरामजी क्रोधके साथ गंभीर वाणी बोले ॥ २७३ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 273 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik