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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 275

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ । अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ ॥ २७५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

विश्वामित्रजीने हृदयमें हँसकर कहा - मुनिको हरा ही हरा सूझ रहा है, किन्तु यह लोहमयी खाँड़ है, ऊखकी खाँड़ नहीं है। खेद है, मुनि अब भी बेसमझ बने हुए हैं, इनके प्रभावको नहीं समझ रहे हैं ॥ २७५ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 275 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik