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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 277

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल । जेहि बस जन अनुचित करहिं चरहिं बिस्व प्रतिकूल ॥ २७७ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

लक्ष्मणजीने हँसकर कहा - हे मुनि! सुनिए, क्रोध पापका मूल है, जिसके वशमें होकर मनुष्य अनुचित कर्म कर बैठते हैं और विश्वभरके प्रतिकूल चलते हैं ॥ २७७ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 277 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik