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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 279

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

गर्भ स्रवहिं अवनिप रवनि सुनि कुठार गति घोर । परसु अछत देखउँ जिअत बैरी भूपकिसोर ॥ २७९ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मेरे जिस कुठार की घोर करनी सुनकर राजाओं की स्त्रियों के गर्भ गिर पड़ते हैं, उसी फरसे के रहते मैं इस शत्रु राजपुत्र को जीवित देख रहा हूँ ॥ २७९ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 279 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik