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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 281

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

प्रभुहि सेवकहि समरु कस तजहु बिप्रबर रोसु । बेषु बिलोकें कहेसि कछु बालकहू नहिं दोसु ॥ २८१ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

स्वामी और सेवक में युद्ध कैसा? हे ब्राह्मण श्रेष्ठ! क्रोध का त्याग कीजिए । आपका (वीरों का सा) वेष देखकर ही बालक ने कुछ कह डाला था, वास्तव में उसका भी कोई दोष नहीं है ॥ २८१ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 281 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik