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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 283

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जौं हम निदरहिं बिप्र बदि सत्य सुनहु भृगुनाथ । तौ अस को जग सुभटु जेहि भय बस नावहिं माथ ॥ २८३ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे भृगुनाथ! यदि हम सचमुच ब्राह्मण कहकर निरादर करते हैं, तो यह सत्य सुनिए, फिर संसार में ऐसा कौन योद्धा है, जिसे हम डरके मारे मस्तक नवाएँ? ॥ २८३ ॥

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