वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात । जोरि पानि बोले बचन हृदयँ न प्रेमु अमात ॥ २८४ ॥
तब उन्होंने श्री रामजी का प्रभाव जाना, (जिसके कारण) उनका शरीर पुलकित और प्रफुल्लित हो गया । वे हाथ जोड़कर वचन बोले - प्रेम उनके हृदय में समाता न था- ॥ २८४ ॥
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