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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 285

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

देवन्ह दीन्हीं दुंदुभीं प्रभु पर बरषहिं फूल । हरषे पुर नर नारि सब मिटी मोहमय सूल ॥ २८५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

देवताओं ने नगाड़े बजाए, वे प्रभु के ऊपर फूल बरसाने लगे । जनकपुर के स्त्री-पुरुष सब हर्षित हो गए । उनका मोहमय (अज्ञान से उत्पन्न) शूल मिट गया ॥ २८५ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 285 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik