वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
सौरभ पल्लव सुभग सुठि किए नीलमनि कोरि । हेम बौर मरकत घवरि लसत पाटमय डोरि ॥ २८८ ॥
नील मणि को कोरकर अत्यन्त सुंदर आम के पत्ते बनाए । सोने के बौर (आम के फूल) और रेशम की डोरी से बँधे हुए पन्ने के बने फलों के गुच्छे सुशोभित हैं ॥ २८८ ॥
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