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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 289

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

बसइ नगर जेहिं लच्छि करि कपट नारि बर बेषु । तेहि पुर कै सोभा कहत सकुचहिं सारद सेषु ॥ २८९ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिस नगर में साक्षात् लक्ष्मीजी कपट से स्त्री का सुंदर वेष बनाकर बसती हैं, उस पुर की शोभा का वर्णन करने में सरस्वती और शेष भी सकुचाते हैं ॥ २८९ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 289 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik