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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 290

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

कुसल प्रानप्रिय बंधु दोउ अहहिं कहहु केहिं देस । सुनि सनेह साने बचन बाची बहुरि नरेस ॥ २९० ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हमारे प्राणों से प्यारे दोनों भाई, कहिए सकुशल तो हैं और वे किस देश में हैं? स्नेह से सने ये वचन सुनकर राजा ने फिर से चिट्ठी पढ़ी ॥ २९० ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 290 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik