वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
कुसल प्रानप्रिय बंधु दोउ अहहिं कहहु केहिं देस । सुनि सनेह साने बचन बाची बहुरि नरेस ॥ २९० ॥
हमारे प्राणों से प्यारे दोनों भाई, कहिए सकुशल तो हैं और वे किस देश में हैं? स्नेह से सने ये वचन सुनकर राजा ने फिर से चिट्ठी पढ़ी ॥ २९० ॥
आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस