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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 301

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

तेहिं रथ रुचिर बसिष्ठ कहुँ हरषि चढ़ाई नरेसु । आपु चढ़ेउ स्यंदन सुमिरि हर गुर गौरि गनेसु ॥ ३०१ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उस सुंदर रथ पर राजा वशिष्ठजी को हर्षपूर्वक चढ़ाकर फिर स्वयं शिव, गुरु, गौरी और गणेशजी का स्मरण करके दूसरे रथ पर चढ़े ॥ ३०१ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 301 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik