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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 302

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

तुरग नचावहिं कुअँर बर अकनि मृदंग निसान । नागर नट चितवहिं चकित डगहिं न ताल बँधान ॥ ३०२ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सुंदर राजकुमार मृदंग और नगाड़े के शब्द सुनकर घोड़ों को उन्हीं के अनुसार इस प्रकार नचा रहे हैं कि वे ताल के बंधान से जरा भी डिगते नहीं हैं । चतुर नट चकित होकर यह देख रहे हैं ॥ ३०२ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 302 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik