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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 304

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

आवत जानि बरात बर सुनि गहगहे निसान । सजि गज रथ पदचर तुरग लेन चले अगवान ॥ ३०४ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

बड़े जोर से बजते हुए नगाड़ों की आवाज सुनकर श्रेष्ठ बारात को आती हुई जानकर अगवानी करने वाले हाथी, रथ, पैदल और घोड़े सजाकर बारात लेने चले ॥ ३०४ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 304 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik