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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 313

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

भाग्य बिभव अवधेस कर देखि देव ब्रह्मादि । लगे सराहन सहस मुख जानि जनम निज बादि ॥ ३१३ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अवध नरेश दशरथजी का भाग्य और वैभव देखकर और अपना जन्म व्यर्थ समझकर, ब्रह्माजी आदि देवता हजारों मुखों से उसकी सराहना करने लगे ॥ ३१३ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 313 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik