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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 314

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु । हृदयँ बिचारहु धीर धरि सिय रघुबीर बिआहु ॥ ३१४ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तब शिवजी ने सब देवताओं को समझाया कि तुम लोग आश्चर्य में मत भूलो । हृदय में धीरज धरकर विचार तो करो कि यह (भगवान की महामहिमामयी निजशक्ति) श्री सीताजी का और (अखिल ब्रह्माण्डों के परम ईश्वर साक्षात् भगवान) श्री रामचन्द्रजी का विवाह है ॥ ३१४ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 314 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik