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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 316

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

प्रभु मनसहिं लयलीन मनु चलत बाजि छबि पाव । भूषित उड़गन तड़ित घनु जनु बर बरहि नचाव ॥ ३१६ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

प्रभु की इच्छा में अपने मन को लीन किए चलता हुआ वह घोड़ा बड़ी शोभा पा रहा है । मानो तारागण तथा बिजली से अलंकृत मेघ सुंदर मोर को नचा रहा हो ॥ ३१६ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 316 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik