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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 324

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जय धुनि बंदी बेद धुनि मंगल गान निसान । सुनि हरषहिं बरषहिं बिबुध सुरतरु सुमन सुजान ॥ ३२४ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जयध्वनि, वन्दीध्वनि, वेदध्वनि, मंगलगान और नगाड़ोंकी ध्वनि सुनकर चतुर देवगण हर्षित हो रहे हैं और कल्पवृक्षके फूल बरसा रहे हैं ॥ ३२४ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 324 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik