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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 328

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

सूपोदन सुरभी सरपि सुंदर स्वादु पुनीत । छन महुँ सब कें परुसि गे चतुर सुआर बिनीत ॥ ३२८ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

चतुर और विनीत रसोइए सुंदर, स्वादिष्ट और पवित्र दाल-भात और गाय का सुगंधित घी क्षण भर में सबके सामने परोस गए ॥ ३२८ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 328 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik