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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 329

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

देइ पान पूजे जनक दसरथु सहित समाज । जनवासेहि गवने मुदित सकल भूप सिरताज ॥ ३२९ ॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

फिर पान देकर जनकजी ने समाज सहित दशरथजी का पूजन किया। सब राजाओं के सिरमौर श्रीदशरथजी प्रसन्न होकर जनवासे को चले ॥ ३२९ ॥

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