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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 331

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

बार बार कौसिक चरन सीसु नाइ कह राउ । यह सबु सुखु मुनिराज तव कृपा कटाच्छ पसाउ ॥ ३३१ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

बार-बार विश्वामित्रजी के चरणों में सिर नवाकर राजा कहते हैं - हे मुनिराज! यह सब सुख आपके ही कृपाकटाक्ष का प्रसाद है ॥ ३३१ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 331 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik