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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 333

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

दाइज अमित न सकिअ कहि दीन्ह बिदेहँ बहोरि । जो अवलोकत लोकपति लोक संपदा थोरि ॥ ३३३ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इस प्रकार जनकजी ने फिर से अपरिमित दहेज दिया, जो कहा नहीं जा सकता और जिसे देखकर लोकपालों के लोकों की सम्पदा भी थोड़ी जान पड़ती थी ॥ ३३३ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 333 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik