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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 335

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

रूप सिंधु सब बंधु लखि हरषि उठा रनिवासु । करहिं निछावरि आरती महा मुदित मन सासु ॥ ३३५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

रूप के समुद्र सब भाइयों को देखकर सारा रनिवास हर्षित हो उठा। सासुएँ महान प्रसन्न मन से निछावर और आरती करती हैं ॥ ३३५ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 335 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik