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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 340

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

कोसलपति समधी सजन सनमाने सब भाँति। मिलनि परसपर बिनय अति प्रीति न हृदयँ समाति॥340॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अयोध्यानाथ दशरथजी ने अपने स्वजन समधी का सब प्रकार से सम्मान किया। उनके आपस के मिलने में अत्यन्त विनय थी और इतनी प्रीति थी जो हृदय में समाती न थी॥340॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 340 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik