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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 342

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

मिले लखन रिपुसूदनहि दीन्हि असीस महीस। भए परसपर प्रेमबस फिरि फिरि नावहिं सीस॥342॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

फिर राजा ने लक्ष्मणजी और शत्रुघ्नजी से मिलकर उन्हें आशीर्वाद दिया। वे परस्पर प्रेम के वश होकर बार-बार आपस में सिर नवाने लगे॥342॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 342 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik