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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 347

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

होहिं सगुन बरषहिं सुमन सुर दुंदभीं बजाइ। बिबुध बधू नाचहिं मुदित मंजुल मंगल गाइ॥347॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

शकुन हो रहे हैं, देवता दुन्दुभी बजा-बजाकर फूल बरसा रहे हैं। देवताओं की स्त्रियाँ आनंदित होकर सुंदर मंगल गीत गा-गाकर नाच रही हैं॥347॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 347 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik