वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
राम प्रतोषीं मातु सब कहि बिनीत बर बैन। सुमिरि संभु गुरु बिप्र पद किए नीदबस नैन॥357॥
विनय भरे उत्तम वचन कहकर श्रीरामचन्द्रजी ने सब माताओं को संतुष्ट किया। फिर शिवजी, गुरु और ब्राह्मणों के चरणों का स्मरण कर नेत्रों को नींद के वश किया॥357॥
आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस