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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 359

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

मंगल मोद उछाह नित जाहिं दिवस एहि भाँति। उमगी अवध अनंद भरि अधिक अधिक अधिकाति॥359॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

नित्य ही मंगल, आनंद और उत्सव होते हैं, इस तरह आनंद में दिन बीतते जाते हैं। अयोध्या आनंद से भरकर उमड़ पड़ी, आनंद की अधिकता अधिक-अधिक बढ़ती ही जा रही है॥359॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 359 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik