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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 37

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

पुलक वाटिका बाग बन सुख सुबिहंग बिहारु । माली सुमन सनेह जल सींचत लोचन चारु ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कथामें जो रोमांच होता है वही वाटिका, बाग और वन हैं; और जो सुख होता है, वही सुन्दर पक्षियोंका विहार है। निर्मल मन ही माली है जो प्रेभरूपी जलसे सुन्दर नेत्रोंद्वारा उनको सींचता है ॥ ३७ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 37 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik