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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 38

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जे श्रद्धा संबल रहित नहिं संतन्ह कर साथ । तिन्ह कहुँ मानस अगम अति जिन्हहि न प्रिय रघुनाथ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिनके पास श्रद्धारूपी राह-खर्च नहीं है और संतोंका साथ नहीं है और जिनको श्रीरघुनाथजी प्रिय नहीं हैं, उनके लिये यह मानस अत्यन्त ही अगम है। (अर्थात् श्रद्धा, सत्संग और भगवत्प्रेमके बिना कोई इसको नहीं पा सकता) ॥ ३८ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 38 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik