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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 39

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर दुहुँ कूला । संतसभा अनुपम अवध सकल सुमंगल मूला ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तीनों प्रकारके श्रोताओंका समाज ही इस नदीके दोनों किनारोंपर बसे हुए पुरवे, गाँव और नगर हैं; और संतोंकी सभा ही सब सुन्दर मङ्गलोंकी जड़ अनुपम अयोध्याजी है ॥ ३९ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 39 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik