वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
ब्रह्म निरूपन धरम बिधि बरनहिं तत्त्व विभाग । कहहिं भगति भगवंत कै संजुत ग्यान बिराग ॥ ४४ ॥
ब्रह्मका निरूपण, धर्मका विधान और तत्त्वोंके विभागका वर्णन करते हैं तथा ज्ञान-वैराग्यसे युक्त भगवानकी भक्तिका कथन करते हैं ॥ ४४ ॥
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