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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 49

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

अति बिचित्र रघुपति चरित जानहिं परम सुजान । जे मतिमंद बिमोह बस हृदयँ धरहिं कछु आन ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रीरघुनाथजीका चरित्र बड़ा ही विचित्र है, उसको पहुँचे हुए ज्ञानीजन ही जानते हैं। जो मंदबुद्धि हैं, वे तो विशेषरूपसे मोहके वश होकर हृदयमें कुछ दूसरी ही बात समझ बैठते हैं ॥ ४९ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 49 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik