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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 50

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

ब्रह्म जो ब्यापक बिरज अज अकल अनीह अभेद । सो कि देह धरि होइ नर जाहि न जानत बेद ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो ब्रह्म सर्वव्यापक, मायारहित, अजनमा, अगोचर, इच्छारहित और भेदरहित है, और जिसे वेद भी नहीं जानते, क्या वह देह धारण करके मनुष्य हो सकता है? ॥ ५० ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 50 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik