वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
तौ सबदरसी सुनिअ प्रभु करउ सो बेगि उपाइ । होइ मरनु जेहिं बिनहिं श्रम दुसह बिपत्ति बिहाइ ॥ ५९ ॥
तो हे सर्वदरसी प्रभो! सुनिये और शीघ्र वह उपाय कीजिये जिससे मेरा मरण हो और बिना ही परिश्रम यह [पति-परित्यागरूपी] असह्य विपत्ति दूर हो जाय ॥ ५९ ॥
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