वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
सती मरत सुनि संभु गन लगे करन मख खीस । जग्य बिधंस बिलोकि भृगु रच्छा कीन्ह मुनीस ॥ ६४ ॥
सतीका मरण सुनकर शिवजीके गण यज्ञ विध्वंस करने लगे। यज्ञका यह विध्वंस होते देखकर मुनिश्रेष्ठ भृगुने उसकी रक्षा की ॥ ६४ ॥
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