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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 66

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

त्रिकालज्ञ सर्वज्ञ तुम्ह गति सर्वत्र तुम्हारी । कहहु सुता के दोष गुन मुनिबर हृदयँ बिचारी ॥ ६६ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

[और कहा-] हे मुनिवर! आप त्रिकालज्ञ और सर्वज्ञ हैं, आपकी सर्वत्र पहुँच है। अतः आप हृदयमें विचारकर कन्याके दोष-गुण कहिये ॥ ६६ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 66 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik