वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
जोगी जटिल अकाम मन नगन अमंगल बेष । अस स्वामी एहि कहँ मिलिहि परी हस्त असि रेष ॥ ६७ ॥
योगी, जटाधारी, निष्कामहृदय, नंगा और अममंगल वेषवाला, ऐसा पति इसको मिलेगा। इसके हाथमें ऐसी ही रेखा पड़ी है ॥ ६७ ॥
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