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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 67

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जोगी जटिल अकाम मन नगन अमंगल बेष । अस स्वामी एहि कहँ मिलिहि परी हस्त असि रेष ॥ ६७ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

योगी, जटाधारी, निष्कामहृदय, नंगा और अममंगल वेषवाला, ऐसा पति इसको मिलेगा। इसके हाथमें ऐसी ही रेखा पड़ी है ॥ ६७ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 67 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik