वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
अस कहि नारद सुमिरि हरि गिरिजहि दीन्हि असीस । होइहि यह कल्यान अब संसय तजहु गिरीस ॥ ७० ॥
ऐसा कहकर भगवान्का स्मरण करके नारदजीने पार्वतीको आशीर्वाद दिया। [और कहा कि-] हे पर्वतराज! तुम सन्देहका त्याग कर दो, अब यह कल्याण ही होगा ॥ ७० ॥
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