वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
सुनहि मातु मैं दीख अस सपन सुनावउँ तोहि । सुंदर गौर सुबिप्रबर अस उपदेसेउ मोहि ॥ ७२ ॥
माँ! सुन, मैं तुझे सुनाती हूँ; मैंने ऐसा स्वप्न देखा है कि मुझे एक सुंदर गौरवर्ण श्रेष्ठ ब्राह्मणने ऐसा उपदेश दिया है- ॥ ७२ ॥
आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस