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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 79

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

अब सुख सोवत सोचु नहीं भीख मागि भव खाहिं । सहज एकाकिन्ह के भवन कबहुँ कि नारि खटाहिं ॥ ७९ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अब शिवको कोई चिंता नहीं रही, भीख माँगकर खा लेते हैं और सुखसे सोते हैं। ऐसे स्वभावसे ही अकेले रहनेवालोंके घर भी भला क्या कभी स्त्रियाँ टिक सकती हैं? ॥ ७९ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 79 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik