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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 81

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

तुम्ह माया भगवान सिव सकल जगत पितु मातु । नाइ चरन सिर मुनि चले पुनि पुनि हरषत गातु ॥ ८१ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आप माया हैं और शिवजी भगवान् हैं। आप दोनों समस्त जगतके माता-पिता हैं। [यह कहकर] मुनि पार्वतीजीके चरणोंमें सिर नवाकर चल दिये। उनके शरीर बार-बार पुलकित हो रहे थे ॥ ८१ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 81 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik