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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 87

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

अब तें रति तव नाथ कर होइहि नामु अनंगु । बिनु बपु ब्यापिहि सबहि पुनि सुनु निज मिलन प्रसंगु ॥ ८७ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे रति! अबसे तेरे स्वामीका नाम अनंग होगा। वह बिना ही शरीरके सबको व्यापेगा। अब तू अपने पतिसे मिलनेकी बात सुन ॥ ८७ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 87 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik