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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 88

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु । निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु ॥ ८८ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे शंकर! सब देवताओंके मनमें ऐसा परम उत्साह है कि हे नाथ! वे अपनी आँखोंसे आपका विवाह देखना चाहते हैं ॥ ८८ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 88 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik