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तिथि

अष्टमी तिथि — तिथि — विधि, व्रत, पूजन प्रश्नोत्तर(85)

अष्टमी तिथि से जुड़े 85 प्रश्न — विधि, नियम, मंत्र, लाभ। शास्त्र-सम्मत व्याख्या एक स्थान पर।

लोक

अष्टमी श्राद्ध में स्वधा का क्या महत्व है?

स्वधा पितृ अर्पण का मंत्र भाव है।

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अष्टमी श्राद्ध में तर्पण कैसे करें?

तिल-कुश-जल से दक्षिणमुख तर्पण करें।

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अष्टमी श्राद्ध में पिण्डदान कैसे करें?

कुशा पर तिल के साथ स्वधा बोलकर।

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अष्टमी श्राद्ध में पिण्ड कैसे बनाते हैं?

चावल, जौ, दूध, घी, शक्कर और मधु से।

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अष्टमी श्राद्ध में सेंधा नमक क्यों?

श्राद्ध भोजन में सेंधा नमक प्रशस्त है।

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अष्टमी श्राद्ध में क्या वर्जित है?

लहसुन, प्याज, मसूर, राजमा और बासी भोजन।

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अष्टमी श्राद्ध में कौन सा भोजन बनता है?

सात्विक भोजन और मधुर पदार्थ।

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अष्टमी श्राद्ध में तांबे का दान क्यों करते हैं?

तांबा पितरों को शीतलता देता है।

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अष्टमी श्राद्ध में तिल न हों तो क्या होता है?

तिल के बिना श्राद्ध अपूर्ण माना गया है।

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अष्टमी श्राद्ध में काले तिल क्यों डालते हैं?

काले तिल पितरों को प्रिय हैं।

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अष्टमी श्राद्ध में कुशा क्यों जरूरी है?

कुशा पितृ कर्म का पवित्र द्रव्य है।

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अष्टमी श्राद्ध में जनेऊ कैसे रखते हैं?

जनेऊ दाहिने कंधे पर रखें।

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अष्टमी श्राद्ध में कौन सा मुख रखना चाहिए?

दक्षिण दिशा की ओर मुख रखें।

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अष्टमी श्राद्ध सुबह करना सही है क्या?

सुबह नहीं, कुतुप या अपराह्न में करें।

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अष्टमी श्राद्ध रात में कर सकते हैं क्या?

नहीं, रात में श्राद्ध वर्जित है।

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अष्टमी श्राद्ध में अपराह्न काल क्यों जरूरी है?

अपराह्न पितरों का मुख्य श्राद्ध समय है।

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अष्टमी श्राद्ध में रौहिण मुहूर्त क्या है?

कुतुप के बाद का शुभ श्राद्ध काल।

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अष्टमी श्राद्ध में कुतुप मुहूर्त क्या है?

श्राद्ध का सबसे श्रेष्ठ समय।

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अष्टमी श्राद्ध में विश्वेदेव कौन हैं?

काम और काल विश्वेदेव।

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अष्टमी श्राद्ध का शास्त्रीय आधार क्या है?

पुराण, स्मृति और गृह्यसूत्र इसका आधार हैं।

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क्षयाह अष्टमी श्राद्ध क्या है?

अष्टमी मृत्यु तिथि वाला श्राद्ध।

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अष्टमी श्राद्ध के चार प्रकार कौन से हैं?

क्षयाह, मध्याष्टमी, अष्टका और भीमाष्टमी।

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अष्टमी श्राद्ध क्यों खास है?

इस दिन पितृ तर्पण अधिक प्रभावी माना गया है।

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अष्टमी श्राद्ध किन पितरों के लिए होता है?

अष्टमी को दिवंगत पितरों के लिए।

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अष्टमी श्राद्ध कब किया जाता है?

मृत्यु अष्टमी को हो तो पितृ पक्ष की अष्टमी पर।

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लोक

अष्टमी श्राद्ध क्या है?

अष्टमी तिथि पर किया गया पितृ श्राद्ध।

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लोक

सप्तमी, अष्टमी और नवमी क्यों खास हैं?

इन तिथियों में पितृ पूजन पितृकल्याण योग बनाता है।

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श्राद्ध फल

प्रतिपदा से अष्टमी तक के तिथि-फल क्या हैं?

याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 के अनुसार तिथि-वार काम्य फल हैं — प्रतिपदा को उत्तम कन्या, द्वितीया को सुयोग्य दामाद और पशु-धन, तृतीया को अश्व यानी वाहन, चतुर्थी को क्षुद्र पशु, पञ्चमी को उत्तम पुत्र, षष्ठी को द्यूत यानी क्रीड़ा में विजय, सप्तमी को कृषि में सफलता, और अष्टमी को वाणिज्य यानी व्यापार में लाभ।

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तिथि निर्णय

सप्तमी या नवमी विद्धा अष्टमी में से व्रत के लिए कौन सी सही है?

शास्त्रों के अनुसार 'सप्तमी' से मिली हुई अष्टमी पर व्रत करना मना है। दुर्गा पूजा के लिए हमेशा 'नवमी' से मिली हुई अष्टमी (परविद्धा) ही सर्वश्रेष्ठ और सिद्धि देने वाली मानी जाती है।

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व्रत एवं त्योहार

अहोई अष्टमी की कथा कौन सी है?

साहूकार की बहू के हाथों अनजाने में सेही का बच्चा मर गया, जिससे उसकी संतानें मरने लगीं। वृद्धाओं की सलाह पर उसने कार्तिक अष्टमी को सेही का चित्र बनाकर अहोई माता की पूजा और क्षमायाचना की। माता की कृपा से उसे फिर सात पुत्र मिले।

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व्रत एवं त्योहार

अहोई अष्टमी व्रत की विधि

अहोई अष्टमी कार्तिक कृष्ण अष्टमी को माताएं संतान की दीर्घायु के लिए रखती हैं। दीवार पर सेही का चित्र बनाएं, सायंकाल पूजा करें, कथा सुनें और तारे उगने पर अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

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देवी उपासना

दुर्गा पूजा में अष्टमी और नवमी में हवन कैसे करें

अष्टमी/नवमी हवन: हवनकुण्ड → अग्नि प्रज्वलन → नवग्रह आहुति → सप्तशती मंत्रों से आहुति + 'स्वाहा' → नवार्ण मंत्र 108 आहुति → नवदुर्गा नाम आहुति → पूर्णाहुति (नारियल + वस्त्र)। कुलाचार अनुसार अष्टमी या नवमी। कन्या भोज + ब्राह्मण भोजन।

#दुर्गा पूजा#अष्टमी#नवमी
व्रत विधि

अहोई अष्टमी व्रत कैसे रखें विधि सहित?

अहोई अष्टमी: कार्तिक कृष्ण अष्टमी (करवा चौथ + 4 दिन)। विधि: निर्जला/फलाहार → अहोई माता (सेही) चित्र → संध्या पूजन-कथा → तारे/चन्द्र देखकर अर्घ्य → व्रत पारण। संतान रक्षा-दीर्घायु हेतु। उत्तर भारत प्रचलित।

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काल भैरव पूजा

काल भैरव पूजा कैसे करें?

काल भैरव पूजा: भैरव अष्टमी/शनिवार/अमावस्या। काले/लाल वस्त्र। पंचामृत स्नान। नीले फूल, सरसों तेल दीपक (5 बाती)। काल भैरव अष्टकम् पाठ। मंत्र 108 बार। नैवेद्य: उड़द + काले तिल।

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नवरात्रि

दुर्गा अष्टमी पर हवन की परंपरा का शास्त्रीय आधार क्या है?

अष्टमी = देवी शक्ति सर्वोच्च (महिषासुर/रक्तबीज वध तिथि)। हवन = अग्नि = देवताओं का मुख। सप्तशती पूर्णाहुति। संधि पूजा (अष्टमी-नवमी) अत्यंत शक्तिशाली। जप का 1/10 = हवन।

#अष्टमी#हवन#शास्त्रीय
आज का पंचांग
आज की तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त

पंचांग सहित दैनिक मुहूर्त, राहु काल और चौघड़िया।

पर्व-पञ्चांग
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होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी — पर्व-केन्द्रित प्रश्नोत्तर।