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22 नवंबर 2025

22 नवंबर 2025 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

22 नवंबर 2025 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
शुक्ल द्वितीया
नक्षत्र
ज्येष्ठा
योग
सुकर्मा
करण
कौलव
वार
शनिवार
हिन्दू मास
मार्गशीर्ष
ऋतु
हेमन्त
सूर्योदय
06:49
सूर्यास्त
17:25

22 नवंबर 2025 के लिए प्रश्नोत्तर

शनिवार को हनुमान जी को तेल-सिंदूर चढ़ाने का विधान?

कथा: हनुमान जी ने राम की आयु बढ़ाने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया। विधि: नारंगी सिंदूर+चमेली तेल, दाहिने कंधे का तिलक। मंगल/शनिवार। शनि ने वचन दिया — हनुमान भक्तों को कष्ट नहीं।

शनि शांति के लिए शनिवार उपाय?

पीपल तेल दीपक+परिक्रमा, 'ॐ शं शनैश्चराय' 108, तिल/तेल/लोहा/कंबल दान, छाया दान, कौवा रोटी, गरीब सेवा, शनि चालीसा। ईमानदारी+मेहनत+सेवा=सबसे बड़ा उपाय।

शनिवार को लोहे की चीजें खरीदना शुभ है या अशुभ?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार को लोहा खरीदना अशुभ है — लोहा शनिदेव का कारक है। शनिवार को लोहे का दान करना शुभ है। बाध्यता में खरीदें तो तुरंत घर अंदर न लाएँ। इस विषय पर मत भिन्नता है।

अष्टका श्राद्ध किन महीनों में होता है?

मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन में।

अविवाहित कन्याएँ माँ कात्यायनी की पूजा क्यों करती हैं?

अविवाहित कन्याएँ पूजा क्यों: गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कात्यायनी की पूजा की थी। आज भी: मार्गशीर्ष माह में कात्यायनी व्रत = मनचाहे जीवनसाथी के लिए। सच्चे मन से पुकारने वाली कन्या को योग्य जीवनसाथी का वरदान।

माँ धूमावती को अलक्ष्मी या ज्येष्ठा क्यों कहते हैं?

माँ धूमावती = अलक्ष्मी (लक्ष्मी की विपरीत) और ज्येष्ठा (दुर्भाग्य की देवी)। लक्ष्मी = सौभाग्य-समृद्धि; धूमावती = दुर्भाग्य-अभाव-कुरूपता का प्रतिनिधित्व। सांसारिक मोह के त्याग का प्रतीक।

अलक्ष्मी (ज्येष्ठा) कौन हैं?

अलक्ष्मी (ज्येष्ठा) = दरिद्रता, कलह और दुर्भाग्य की अधिष्ठात्री। मलिन वस्त्र, लाल नेत्र, बूढ़ी, दंतहीन, भयंकर। मंथन में शुभ से पहले विकार-विष निकलते हैं — यह गहरा मनोवैज्ञानिक सत्य है।

तांत्रिक पूजा के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

तांत्रिक पूजा के लिए शनिवार और रविवार सबसे उत्तम दिन हैं — निशिता काल (मध्यरात्रि) में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

शनिवार को लोहे की वस्तु खरीदना शुभ है या अशुभ?

शनिवार को लोहा खरीदना अशुभ माना जाता है क्योंकि लोहा शनिदेव की धातु है और इससे उनकी नाराजगी का भय रहता है। लोहा दान करना शुभ है — खरीदना वर्जित।

शनिवार को क्या चीजें नहीं खरीदनी चाहिए

लोक मान्यता: शनिवार को लोहा/स्टील, काले कपड़े, तेल, नमक, चाकू, झाड़ू न खरीदें। दान करें: सरसों तेल, काले कपड़े। पूर्णतः ज्योतिषीय/लोक परंपरा — वैदिक ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख नहीं।

शनिवार को काला पहनना शुभ है या अशुभ

ज्योतिष: शनिवार काला/नीला = शुभ (शनि प्रसन्नता, दोष शमन)। कुछ लोक मान्यता: काला = अशुभ। प्रचलित मत: शनिवार काला शुभ। शनि उपाय: सरसों तेल/उड़द दान, हनुमान पूजा।

मंगलवार शनिवार को बाल कटवाना चाहिए या नहीं

लोक मान्यता: मंगलवार/शनिवार/गुरुवार बाल कटवाना अशुभ। शुभ: सोमवार/बुधवार/शुक्रवार। किसी शास्त्रीय ग्रंथ में उल्लेख नहीं — पूर्णतः लोक परंपरा। आवश्यकता अनुसार कटवा सकते हैं।

पीपल पर जल चढ़ाने का शनिवार को क्या महत्व है

शनिवार को पीपल पर शनि की छाया मानी गई है। शनि साढ़ेसाती, ढैय्या, महादशा में यह उपाय अत्यन्त लाभकारी है। स्टील/पीतल के लोटे से काली तिल मिला जल चढ़ाएँ, 'ॐ शं शनिश्चराय नमः' जप करें, 7-11 परिक्रमा करें। तांबे का लोटा वर्जित। शनि कृपा, ग्रह शान्ति, आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।

पीपल के पेड़ की पूजा कैसे करें?

पीपल पूजा: शनिवार सर्वोत्तम। विधि: स्नान → जड़ में जल → रोली-अक्षत → कलावा बाँधें → सरसों तेल दीपक → 7+ परिक्रमा → 'मूले ब्रह्मा त्वचा विष्णुः...' मंत्र → प्रणाम। त्रिमूर्ति वास (जड़-ब्रह्मा, तना-विष्णु, शाखा-शिव)। बुधवार-रविवार जल वर्जित। कभी न काटें।

मंदिर में सुंदरकांड पाठ करवाने का क्या नियम है?

सुंदरकांड नियम: मंगलवार/शनिवार सायंकाल। विधि: स्नान → लाल/केसरिया वस्त्र → हनुमान चालीसा → सम्पूर्ण सुंदरकांड → हनुमान चालीसा → आरती → प्रसाद। विशेष: 7/11/21/40 दिन निरंतर। बीच में न उठें, मोबाइल बन्द। फल: संकट मुक्ति, शनि शान्ति, शत्रु विजय, बाधा निवारण।

भैरव साधना कब करनी चाहिए?

भैरव साधना: भैरव अष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी — सर्वश्रेष्ठ)। प्रत्येक शनिवार। अमावस्या रात्रि। चतुर्दशी। निशीथ काल (रात 12 बाद)। उत्तर/पूर्व मुख। संध्या काल वर्जित।

काल भैरव पूजा कैसे करें?

काल भैरव पूजा: भैरव अष्टमी/शनिवार/अमावस्या। काले/लाल वस्त्र। पंचामृत स्नान। नीले फूल, सरसों तेल दीपक (5 बाती)। काल भैरव अष्टकम् पाठ। मंत्र 108 बार। नैवेद्य: उड़द + काले तिल।

गीता जयंती कब और क्यों मनाते हैं?

गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (मोक्षदा एकादशी) को मनाई जाती है। इसी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। यह एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है।

सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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